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कर्नाटक अपार्टमेंट ओनरशिप और मैनेजमेंट बिल 2026 विधानसभा में पेश

Kavita2
20 Aug 2026 10:59 AM IST
कर्नाटक अपार्टमेंट ओनरशिप और मैनेजमेंट बिल 2026 विधानसभा में पेश
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने अपार्टमेंट मालिकों के अधिकार, प्रबंधन व्यवस्था और साझा सुविधाओं के उपयोग को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से एक नया कानून लाने की पहल की है। इसी कड़ी में कर्नाटक अपार्टमेंट (ओनरशिप और मैनेजमेंट) बिल, 2026 को विधानसभा में पेश किया गया है।

इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में अपार्टमेंट से जुड़े अलग-अलग कानूनों को एक साथ लाना और अपार्टमेंट मालिकों के अधिकारों को स्पष्ट करना है। प्रस्तावित कानून के तहत उन आवासीय परियोजनाओं को शामिल किया जाएगा, जिनमें एक या उससे अधिक इमारतों में आठ से अधिक अपार्टमेंट होंगे।

सरकार का कहना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और अपार्टमेंट संस्कृति के विस्तार को देखते हुए एक स्पष्ट कानूनी व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही थी। वर्तमान में कई जगहों पर अपार्टमेंट के रखरखाव, कॉमन एरिया के इस्तेमाल और मालिकों के अधिकारों को लेकर विवाद सामने आते रहते हैं। नए कानून से इन मामलों में स्पष्टता आने की उम्मीद है।

विधेयक के उद्देश्य और कारणों के बयान के अनुसार, यह कानून अपार्टमेंट के प्रबंधन और अपार्टमेंट परिसरों में मौजूद साझा क्षेत्रों और सुविधाओं के उपयोग के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था तैयार करेगा। इसके अलावा यह अलग-अलग अपार्टमेंट की व्यक्तिगत ओनरशिप और कॉमन एरिया में मालिकों के अधिकारों को भी परिभाषित करेगा।

प्रस्तावित कानून में अपार्टमेंट मालिकों को उनके फ्लैट के साथ-साथ बिल्डिंग के साझा हिस्सों में अविभाजित अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। इसका मतलब है कि हर अपार्टमेंट मालिक का कॉमन एरिया और सुविधाओं में भी एक निश्चित अधिकार होगा, जिसे अलग नहीं किया जा सकता।

विधेयक में कॉमन एरिया और सुविधाओं की विस्तृत परिभाषा दी गई है। इनमें सीढ़ियां, लिफ्ट, लिफ्ट लॉबी, सीढ़ी लॉबी, फायर एस्केप, कॉरिडोर, आने-जाने के रास्ते और बिल्डिंग के साझा प्रवेश एवं निकास द्वार शामिल हैं।

इसके अलावा टेरेस, पार्क, गार्डन, बच्चों के खेलने की जगह, खुली पार्किंग, पानी की टंकी, संप, पंप और मोटर जैसी सुविधाओं को भी कॉमन एरिया का हिस्सा माना गया है। इन सुविधाओं के रखरखाव और उपयोग को लेकर नियम तय किए जाएंगे।

अपार्टमेंट परियोजनाओं में अक्सर कॉमन सुविधाओं के इस्तेमाल और रखरखाव को लेकर मालिकों और बिल्डरों या सोसाइटी प्रबंधन के बीच विवाद देखने को मिलते हैं। नए कानून का उद्देश्य ऐसे विवादों को कम करना और सभी पक्षों के अधिकारों को स्पष्ट करना है।

हालांकि, यह विधेयक सभी प्रकार की इमारतों पर लागू नहीं होगा। इसमें सरकारी कार्यालय, एकल स्वामित्व वाली इमारतें और कुछ अन्य श्रेणियों की संपत्तियों को शामिल नहीं किया गया है। यानी जिन भवनों में एक ही व्यक्ति या संस्था का पूरा स्वामित्व है, वे इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगे।

शहरी क्षेत्रों में अपार्टमेंट की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में बड़ी संख्या में लोग बहुमंजिला आवासीय परियोजनाओं में रह रहे हैं। ऐसे में अपार्टमेंट मालिकों के अधिकारों और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर स्पष्ट कानून की मांग लंबे समय से की जा रही थी।

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि एक समान कानून बनने से खरीदारों और अपार्टमेंट मालिकों को अधिक सुरक्षा मिल सकती है। इससे बिल्डरों, अपार्टमेंट एसोसिएशन और निवासियों के बीच जिम्मेदारियां भी स्पष्ट हो सकेंगी।

विधेयक में अपार्टमेंट प्रबंधन की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है। इसमें यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि साझा सुविधाओं का रखरखाव सही तरीके से हो और सभी निवासियों को समान अधिकार मिले।

कर्नाटक सरकार का मानना है कि यह कानून राज्य में अपार्टमेंट संस्कृति को अधिक व्यवस्थित बनाएगा। इससे संपत्ति खरीदने वाले लोगों को अपने अधिकारों को समझने में मदद मिलेगी और भविष्य में होने वाले विवादों को कम किया जा सकेगा।

अब इस विधेयक पर विधानसभा में चर्चा होगी। चर्चा और आवश्यक संशोधनों के बाद इसे मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। कानून बनने के बाद कर्नाटक में अपार्टमेंट स्वामित्व और प्रबंधन से जुड़े मामलों के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार हो सकेगा।

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